Tuesday, March 15, 2011

सरहद एक दर्द



कबीर-पिताजी क्या हुआ.. श्याम देखो तो, पिताजी को क्या हुआ है। मैं जाकर डॉक्टर को बुलाता हूं।

श्याम- भइया..पिताजी नहीं रहे।

कबीर- क्या

श्याम- भइया देखो पिताजी कुछ लिख रहे थे।

कबीर- पड़ो तो सही.. क्या लिखा है?

श्याम (डायरी पढ़ते हुए...)

आखिर ये कबूतर मेरे घर के हैं या फिर पड़ोस के। मुझे नहीं मालूम.. मुझे तो ये सभी एक जैसे लगते हैं। मेरा तो एक ही काम है.. इन्हें दाना देना और ये दोनों मेरे दिए दाने को चाव से खाते भी हैं। लेकिन कुछ लोग कहते हैं कि ये कबूतर पाकिस्तान से उड़कर हिंदुस्तान आए हैं. अरे तो पागल हैं.. इन्हें क्या पता कि सरहद क्या होती है।

एक बड़ा सा मकान.. मकान के बाहर एक आंगन जिसके बीचो-बीच एक तुलसी का पौधा लगा हुआ था. बाहर से रिक्शे वालों की आवाज से लेकर, चने वाले और लोगों के लड़ने झगड़ने की आवाजे आती थी। सन् 1948 शहर लाहौर

इस मकान में तीन लोग रहते थे। मां-पिताजी और भवानी। भवानी..जो मैं हूं.. या कहूं भवानी..जिसका मुझे नाम मिला.. घर मिला यहां तक की मां-बाप भी मिले। देश भर में आजादी के बाद.. देश को एक साथ जोड़ने और अलग देश की मांग करने वालों में जंग चल रही थी। लोग एक दूसरे को मारने पर उतारू थे। पूरे देश से खून खराबे की खबरें लगातार आ रही थी। लेकिन इन सब बातों से दो घर अंजाम थे।

शाम का वक्त था.. कमरे से एक लड़का निकला..जिसका नाम था.. भवानी। भवानी जोर से चिल्लाया.. मां जावेद भाई ने कहा है कि इस बार दीवाली उनके घर पर मनाई जाएगी। मां बोली..ठीक है भवानी, तो उनसे भी जाकर कह दे कि अगर दीवाली की मिठाई उनके घर से आएगी.. तो ईद की सेवइयां हमारे घर से आएगी। भवानी ने बोला.. ठीक है मां, जैसा तुम कहो। मैं जावेद भाई के घर जा रहा हूं.. और वहां से हम दोनों मेला देखने जाएंगे। ये कहते हुए भवानी घर से निकल पड़ा.. जावेद के घर की तरफ।

जावेद के घर पहुंचते ही.. भवानी ने आवाज लगाई। जावेद...जावेद..अंदर से आवाज आई..कौन.. भवानी। अंदर आ जाओ। बाहर क्यों खड़े हो? भवानी ने कहा.. नहीं रुकने का समय नहीं है। जल्दी से तैयार हो जाओ। नजदीक ही नौटंकी लगी है। देखने चलना है। जावेद कुछ बोलने की कोशिश कर रहा था.. लेकिन भवानी ने उसे रोक दिया। भवानी ने कहा,,लेकिन वेकिन कुछ नहीं..मैंने कहा चलना है, तो चलना है। भवानी ने घर के चारों तरफ देखते हुए जावेद से पूछा.. अरे अम्मी कहां है। जावेद ने कहा..अम्मी अंदर है। भवानी घर के अंदर दौड़ा..और जोर से अवाज लगाई। अम्मी...मां ने कहा है कि दीवाली की मिठाई आपके घर से आएगी.. तो ईद की सेवइयां हमारे घर से आएगी। अंदर से एक अम्मी की आवाज आई.. ठीक है। सालों से ऐसा ही होता आया है। लेकिन तू इतनी जल्दी में क्यों है और जावेद को लेकर कहां जा रहा है? भवानी ने कहा हम नौटंकी देखने जा रहे हैं। अम्मी ने रोकने की कोशिश की.. लेकिन भवानी ने कहा.. अब सुनने का समय नहीं है... और जावेद का हाथ पकड़कर उसे लेकर चल पड़ा। अम्मी पीछे से आवाज देती रही। लेकिन दोनों तो मानो आजाद पंछी की तरह बस खुले आसमान में उड़ने को बेताब हो।

मेला देखते देखते दोनों को रात काफी हो गई। भवानी ने कहा..यार जावेद.. रात काफी हो गई है..अब तो ख़ैर नहीं। जावेद बोला..मैंने कहा थी न कि हमें देर हो जाएगी। भवानी ने कहा..यार मेरे पर एक तरकीब है..इससे हम दोनों पिटाई से बच जाएंगे। जावेद ने पूछा..तो जल्दी बता क्या करना है। भवानी ने कहा..जावेद ऐसा कर..तू मेरे घर चला जा और मैं तेरे घर चला जाता हूं। दोनों ने ऐसा ही किया। जावेद जैसे ही घर पहुंचा.. तो मां ने पूछा..अरे जावेद तू इतनी रात.. और भवानी कहां है। तो जावेद ने जवाब दिया कि वो उसके घर पर है.. उसे नींद आ रही थी.. इसलिए वो वहीं पर सो गया और यही बताने मैं यहां आया था.. लेकिन अब देर हो गई है तो मैं सोच रहा हूं कि मैं यहीं पर रुक जाऊं। मां ने उसकी तरफ देखा और कहा क्यों नहीं तू भी तो भवानी जैसा ही है..तू है तो मुझे ऐसा ही लगता है कि मानो भवानी मेरे साथ है। ये कहकर मां जावेद के लिए खाना रखने लगी..कुछ देर बाद पिताजी भी आ गए और फिर सभी खाना खाकर सो गए।

जारी है...

4 comments:

सुशील बाकलीवाल said...

बढिया प्रस्तुति.

शुभागमन...!
कामना है कि आप ब्लागलेखन के इस क्षेत्र में अधिकतम उंचाईयां हासिल कर सकें । अपने इस प्रयास में सफलता के लिये आप हिन्दी के दूसरे ब्लाग्स भी देखें और अच्छा लगने पर उन्हें फालो भी करें । आप जितने अधिक ब्लाग्स को फालो करेंगे आपके ब्लाग्स पर भी फालोअर्स की संख्या उसी अनुपात में बढ सकेगी । प्राथमिक तौर पर मैं आपको 'नजरिया' ब्लाग की लिंक नीचे दे रहा हूँ, किसी भी नये हिन्दीभाषी ब्लागर्स के लिये इस ब्लाग पर आपको जितनी अधिक व प्रमाणिक जानकारी इसके अब तक के लेखों में एक ही स्थान पर मिल सकती है उतनी अन्यत्र शायद कहीं नहीं । प्रमाण के लिये आप नीचे की लिंक पर मौजूद इस ब्लाग के दि. 18-2-2011 को प्रकाशित आलेख "नये ब्लाग लेखकों के लिये उपयोगी सुझाव" का माउस क्लिक द्वारा चटका लगाकर अवलोकन अवश्य करें, इसपर अपनी टिप्पणीरुपी राय भी दें और आगे भी स्वयं के ब्लाग के लिये उपयोगी अन्य जानकारियों के लिये इसे फालो भी करें । आपको निश्चय ही अच्छे परिणाम मिलेंगे । पुनः शुभकामनाओं सहित...

नये ब्लाग लेखकों के लिये उपयोगी सुझाव.

उन्नति के मार्ग में बाधक महारोग - क्या कहेंगे लोग ?

आनन्‍द पाण्‍डेय said...

ब्‍लागजगत पर आपका स्‍वागत है ।

नि:शुल्‍क संस्‍कृत सीखें । ब्‍लागजगत पर सरल संस्‍कृतप्रशिक्षण आयोजित किया गया है
संस्‍कृतजगत् पर आकर हमारा मार्गदर्शन करें व अपने
सुझाव दें, और अगर हमारा प्रयास पसंद आये तो संस्‍कृत के प्रसार में अपना योगदान दें ।

यदि आप संस्‍कृत में लिख सकते हैं तो आपको इस ब्‍लाग पर लेखन के लिये आमन्त्रित किया जा रहा है ।

हमें ईमेल से संपर्क करें pandey.aaanand@gmail.com पर अपना नाम व पूरा परिचय)

धन्‍यवाद

हरीश सिंह said...

bahut sundar bhavmai rachna

हरीश सिंह said...

" भारतीय ब्लॉग लेखक मंच" की तरफ से आप को तथा आपके परिवार को होली की हार्दिक शुभकामना. यहाँ भी आयें, फालोवर अवश्य बने . . www.upkhabar.in

Post a Comment