Saturday, February 26, 2011

जाने कहां गए जूते


कुछ साल पहले एक एड देखी थी, जिसके बोल कुछ इस तरह थे, देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान कितना बदल गया इंसान। इस एड में मंदिर में कई भक्त आते हैं। कोई खडाऊ पहनकर तो कोई लैदर के जूते पहनकर। लेकिन जब वो मंदिर से बाहर आते हैं, तो उनके जूते चोरी हो जाते हैं। कुछ ऐसा ही वाकैया मेरे साथ भी हुआ। शनिवार को मैं पटपटगंज स्थित साईं मंदिर गया था। रात के करीब साढ़े नौ बज गए थे। मेरे पास मेरा बैग, एक हेलमेट और मेरे कीमती जूते थे। वो जूते जिन्हें मैंने कुछ एक दो महीने पहले ही खरीदा था। इन सबको मैंने उतारकर मंदिर के बाहर रख दिया। मैंने पूजा की एक थाली ली। फिर मैं पूजा करने के लिए मंदिर के अंदर चला गया। करीब पंद्रह से बीस मिनट बाद मैं मंदिर से बाहर आया, तो देखा कि मेरा बैग और मेरा हेलमेट तो है लेकिन मेरे जूते नहीं है। उन्हें कोई चुराकर ले गया है। मुझे इस बात का कोई अफसोस नहीं हुआ कि वो चोर मेरे जूते ले गया। लेकिन मैं ये सोच रहा था कि आखिर मैं अब घर कैसे जाउंगा। मेरे पैर पर जूते नहीं थे और मुझे बाइक से घर जाना था। मन में कई सवाल आ रहे थे, कि बाइक के गेयर कैसे बदलूंगा। कुछ ऐसा ही वाकैया मेरे दो साथियों के साथ भी हुआ था, एक के साथ दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम के पास के साईं मंदिर में तो एक के साथ रोहणी के साईं मंदिर में। लगता है चोरों को साईं मंदिर भाने लगा है। खैर मैं अपने मन को बस यहीं दिलासा दे रहा था कि बेटे तू तो अच्छा रहा, क्योंकि तेरा घर तो नजदीक है। मैंने अपनी जेब में से एक का सिक्का निकाला और बाहर बैठी माई को दे दिया। फिर मैंने अपनी बाइक को किक मारी, लेकिन इसमें मेरे पैर पर लग गई। गेयर बदले और फिर चलने लगा। लेकिन घर पहुंचने से पहले पूरे रास्ते में मैं हर उस शख्स के पैर देख रहा था जिस पर मुझे शक हो रहा था। लेकिन अफसोस मुझे मेरे जूते नहीं मिल सके।

2 comments:

ब्लैंक पेज said...

नेक्सट टाइम संभल कर जाइएगा...ऐसा ना हो कि अपनी इस गलती से आप कोई सबक ना लें और जूते चुराने वाला अपना रिकार्ड कायम रखते हुए शोरुम ही ना खोल लें...

Websites said...

Good evening there, always enjoy reading your blog posts. Keep up the great Work!
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